अपडेट (19 सितंबर 2026
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को इस बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 कानून बन चुका है।
इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले टॉप 5 देशों (जिनमें भारत भी शामिल है) पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।
हालांकि टैरिफ तुरंत लागू नहीं होगा। अंतिम फैसला राष्ट्रपति के हाथ में है कि वे टैरिफ लगाते हैं या नहीं।
भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगी और सभी जरूरी कदम उठाएगी।
अमेरिका का बड़ा कदम: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का खतरा, भारत भी निशाने पर
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 16 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण बिल पारित किया है, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है
बिल का नाम और वोटिंग
इस बिल का नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह बिल 262 मतों के समर्थन और 159 मतों के विरोध से पारित हुआ। इससे पहले अमेरिकी सीनेट भी इस बिल को मंजूरी दे चुका था। अब यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है
बिल में क्या है खास?
इस कानून के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलेगा कि वे रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकें।
भारत और चीन इस सूची में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा बिल में रूसी अधिकारियों, बैंकों और प्रतिबंधों से बचकर तेल ले जाने वाले "शैडो फ्लीट" के जहाजों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, यह बिल अपने आप 100% टैरिफ लागू नहीं करता। अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के अधिकार में रहेगा।
भारत का क्या कहना है?
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अमेरिकी कांग्रेस में इस बिल के पारित होने पर नजर बनाए हुए है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न देशों से तेल खरीद जारी रखेगा। साथ ही भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए भी तैयार है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है
भारत फिलहाल रूस से अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
यदि अमेरिका भविष्य में वास्तव में 100% टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
आगे क्या हो सकता है
अब सभी की नजर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर रहेगी। यदि वे इस बिल पर हस्ताक्षर करते हैं, तो अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ा सकता है।
भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह उद्योग संगठनों और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति का लगातार आकलन करेगी और देश के हितों के अनुसार आवश्यक कदम उठाएगी।
निष्कर्ष
रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका का यह नया कदम भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। एक ओर देश की ऊर्जा सुरक्षा है, तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक बातचीत तेज होने की संभावना है
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| भारत अमेरिका व्यापार संबंध 2026 |
FAQ भारत अमेरिका व्यापार संबंध 2026
प्रश्न: इस बिल का नाम क्या है?
उत्तर: Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026।
प्रश्न: क्या भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लग जाएगा?
उत्तर: नहीं। यह बिल केवल राष्ट्रपति को अधिकार देता है। टैरिफ लगाना या नहीं लगाना उनका निर्णय होगा।
प्रश्न: भारत रूस से तेल क्यों खरीदता है?
उत्तर: रूस से मिलने वाला अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करता।




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